शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

गाथा हिन्दुस्तान की...

आओ सुनाता हूँ मै गाथा
अपने  हिन्दुस्तान की,
गौरवशाली इतिहास की 
और व्यथित वर्तमान की 
 
गंगा की निर्मल धरा से,
बाजार के मिनरल वाटर तक
स्वर्ण रजत की थालो से,
थर्मोकोल की प्लेटो तक

रिश्तो की गर्माहट से,
फेसबुक की चाहत तक
शास्त्रों के प्रज्ञान से,
गूगल के विज्ञान तक

सर्वेभवन्तु सुखिनः से ,
नक्सल आतंकवाद तक
अखंड भारतवर्ष से टूटते,
'खंडित' कश्मीर 'आज़ाद' तक

माता-पिता के चरणों से,
'मॉम-डैड' के कंधो तक
नारी शक्ति की पूजा से,
वेश्यावृत्ति के धंधो तक

विक्रम के न्याय से,
'राखी के इन्साफ' तक
गौ सेवा - ईश्वर सेवा से,
गौ चर्म के व्यापार तक
'नालंदा-तक्षशिला' को छोड़,
ऑक्सफोर्ड की चौखट तक
'विश्वगुरु' भारत से पीछे,
'प्रगतिशील' इस भारत तक

पर इस प्रगति की दौड़ में,
हम भूल रहे संस्कार को
भूल रहे संस्कृति व भारतीय आकर को
बचा सको तो बचा लो,
इस देश को बाजार से
वरना बिक जायेगी ये सभ्यता
'उनकी' एक ललकार से

सोमवार, 29 जून 2009

बुधवार, 5 मार्च 2008

आख़िर क्या होगा इस देश का ???



रहा होगा कभी भारत सोने की चिडिया
पर सोने की चिडिया को निगल रहे भेड़िया
चारो तरफ़ दहशत भ्रष्टाचार है
प्रकाश सदृश्य देश मे फैला अंधकार है
आख़िर क्या होगा इस देश का ???


जहाँ कभी तरसते थे युवा
बनने को देश के फौजी
धुएँ मे उडाते है ज़िंदगी
उभरते क्रिकेट के मनमौजी
प्रजातंत्र के नाम पर
ठगती रहती है सत्ता
चन्द रुपये देकर समझती है
दे दिया बेरोजगारी भत्ता॥
आख़िर क्या होगा इस देश का??


देखो भैया !!!
क्या अजब तमाशा है
सूखे खेत मे बैठा किसान
फिर भी बारिश की आशा है
हो राम का सेतु, या राम का मन्दिर
चलते है राजनैतिक तीर
यहाँ गरीबो की झोली खाली है
टाटा - अम्बानी भाग्यशाली है
आख़िर क्या होगा इस देश का???


जहाँ राष्ट्र से अलग महाराष्ट्र होता है
वहाँ उल्लू शासन दिन मे सोता है
जहाँ बेकसूर हिन्दीभाषी सताए जाते हो
वहाँ हम तो क्या, संविधान भी रोता है
जहाँ शिक्षा बन गई हो कारोबार
यहाँ शिक्षक मालामाल, और विद्यार्थी है लाचार
आख़िर क्या होगा इस देश का???

'महिला शक्ति - राष्ट्र शक्ति'
नारे खूब लगते आए
सत्ता सुख मिलने पर सबको
पुरूष ही पुरुष नज़र आये
भूल गए की ये है ममतामयी माँ, ये है नारी शक्ति
हर धर्म करता है इसके बहुरूप की भक्ति

फिर भी.....कभी तो 'कल्पना' साकार होगी
'प्रतिभा' कभी तो निखर लेगी
....शायद तभी कुछ होगा इस देश का।




इसी उम्मीद के साथ
आपका
हेमंत गोयल


बुधवार, 20 फ़रवरी 2008

वीर शहीदों को नमन !!!!

आए दिन सुनते है हम,

जवानों के शहीदी गम.

कभी आतंकी, कभी नक्सली,

प्राणशक्ति छिन लेते है.

फिर भी 'भारत रत्न' हमारे,

निडरता से जीते है.

हम क्यों पूछे उन दरिंदों से,

क्या मिलता है रक्त बहने मे.

आख़िर कौन सा सुख निहित है

लाशों के ढेर बिछाने मे?

पशुपति से तिरुपति तक फैला है विस्तार,

जाने क्यों करते आए, ये भीषण नरसंहार.

पर क्यों आज लगता है ऐसे,

हम बने पत्थर दिल इंसान हो जैसे.

कभी परवाह करते है,

ही कभी कोई गिला किया.

वे तो सचमुच दिलदार ही थे,

जो स्वयं ही अपना कफ़न सिया।

घड़ी अब वो गई है,

रणभेरी फिर से बज उठी है.

अब कदम आगे बढ़ाना होगा,

सिंह सम दहाड़ना होगा.

आज हम हो वचनबद्ध

भारत की जय लगायेंगे.

चाहे जितने तूफां आए,

सबसे टकरा जायेंगे।

छत्तीसगढ़ महतारी कर रही पुकार,

दो करोड़ छत्तीस्गिढयो का सुखी रहे परिवार.....

छत्तीसगढ़ मे हुई नक्सली हिंसा मे मरे गए वीर शहीदों को शत शत नमन !!!!