बुधवार, 20 फ़रवरी 2008

वीर शहीदों को नमन !!!!

आए दिन सुनते है हम,

जवानों के शहीदी गम.

कभी आतंकी, कभी नक्सली,

प्राणशक्ति छिन लेते है.

फिर भी 'भारत रत्न' हमारे,

निडरता से जीते है.

हम क्यों पूछे उन दरिंदों से,

क्या मिलता है रक्त बहने मे.

आख़िर कौन सा सुख निहित है

लाशों के ढेर बिछाने मे?

पशुपति से तिरुपति तक फैला है विस्तार,

जाने क्यों करते आए, ये भीषण नरसंहार.

पर क्यों आज लगता है ऐसे,

हम बने पत्थर दिल इंसान हो जैसे.

कभी परवाह करते है,

ही कभी कोई गिला किया.

वे तो सचमुच दिलदार ही थे,

जो स्वयं ही अपना कफ़न सिया।

घड़ी अब वो गई है,

रणभेरी फिर से बज उठी है.

अब कदम आगे बढ़ाना होगा,

सिंह सम दहाड़ना होगा.

आज हम हो वचनबद्ध

भारत की जय लगायेंगे.

चाहे जितने तूफां आए,

सबसे टकरा जायेंगे।

छत्तीसगढ़ महतारी कर रही पुकार,

दो करोड़ छत्तीस्गिढयो का सुखी रहे परिवार.....

छत्तीसगढ़ मे हुई नक्सली हिंसा मे मरे गए वीर शहीदों को शत शत नमन !!!!

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