रहा होगा कभी भारत सोने की चिडिया
पर सोने की चिडिया को निगल रहे भेड़िया
चारो तरफ़ दहशत भ्रष्टाचार है
प्रकाश सदृश्य देश मे फैला अंधकार है
आख़िर क्या होगा इस देश का ???
जहाँ कभी तरसते थे युवा
बनने को देश के फौजी
धुएँ मे उडाते है ज़िंदगी
उभरते क्रिकेट के मनमौजी
प्रजातंत्र के नाम पर
ठगती रहती है सत्ता
चन्द रुपये देकर समझती है
दे दिया बेरोजगारी भत्ता॥
आख़िर क्या होगा इस देश का??
देखो भैया !!!
क्या अजब तमाशा है
सूखे खेत मे बैठा किसान
फिर भी बारिश की आशा है
हो राम का सेतु, या राम का मन्दिर
चलते है राजनैतिक तीर
यहाँ गरीबो की झोली खाली है
टाटा - अम्बानी भाग्यशाली है
आख़िर क्या होगा इस देश का???
जहाँ राष्ट्र से अलग महाराष्ट्र होता है
वहाँ उल्लू शासन दिन मे सोता है
जहाँ बेकसूर हिन्दीभाषी सताए जाते हो
वहाँ हम तो क्या, संविधान भी रोता है
जहाँ शिक्षा बन गई हो कारोबार
यहाँ शिक्षक मालामाल, और विद्यार्थी है लाचार
आख़िर क्या होगा इस देश का???
'महिला शक्ति - राष्ट्र शक्ति'
नारे खूब लगते आए
सत्ता सुख मिलने पर सबको
पुरूष ही पुरुष नज़र आये
भूल गए की ये है ममतामयी माँ, ये है नारी शक्ति
हर धर्म करता है इसके बहुरूप की भक्ति
फिर भी.....कभी तो 'कल्पना' साकार होगी
'प्रतिभा' कभी तो निखर लेगी
....शायद तभी कुछ होगा इस देश का।
इसी उम्मीद के साथ
आपका
हेमंत गोयल
1 टिप्पणी:
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